105 KM और डमरू वाली कांवड़... हाथों से चलने वाले बिच्छू बम की कहानी
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सावन में सुल्तानगंज से बाबाधाम तक जाने वाले कांवड़िया पथ पर हर कदम पर आस्था के अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं. Newsiline Aaj Tak की इस रिपोर्ट का सारांश देता है और पूरी खबर के लिए पाठकों को मूल प्रकाशक तक ले जाता है।
Key Points
- मूल रिपोर्ट Aaj Tak ने प्रकाशित की।
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- पूरे लेख के लिए पाठकों को प्रकाशक तक भेजा जाता है।
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